दीनदयाल उपाध्याय: चिंतक, विचारक और लेखक

  • डा. राधा कृष्णा विश्नोई अग्निहोत्री वाणिज्य विभाग, डी ए वी कालेज, कानपुर

Abstract

दीनदयाल उपाध्याय राजनेता मात्र नहीं थे, वह उच्च कोटि के चिंतक, विचारक और लेखक भी थे। इस रूप में उन्होंने श्रेष्ठ शक्तिशाली और संतुलित रूप में विकसित राष्ट्र की कल्पना की थी। उन्होंने निजी हित व सुख सुविधाओं का त्याग कर दिया था। व्यक्तिगत जीवन में उनकी कोई महत्वाकांक्षा भी नहीं थी। उन्होंने अपना जीवन समाज और राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। यही बात उन्हें महान बनाती है।


राजनीति में लगातार सक्रियता के बाद भी वह अध्ययन व लेखन के लिये समय निकालते थे। इसके लिये वह अपने विश्राम से समय कटौती करते थे। इसी में लोगों से मिलने जुलने और अनवरत यात्राओं का क्रम भी चलता था। आमजन के बीच रहना उन्हें अच्छा लगता था। शायद यही कारण था कि वह देश के आम व्यक्ति की समस्याओं को भलीभांति समझ चुके थे। यह विषय उनके चिंतन व अध्ययन में समाहित था। इनका वह कारगर समाधान भी प्रस्तुत करते थे।


मुख्य शब्दः एकात्म, मानव दर्शन, मानवता, दीनदयाल उपाध्याय।


 

Published
2018-04-24
How to Cite
विश्नोई, डा. राधा कृष्णा. दीनदयाल उपाध्याय: चिंतक, विचारक और लेखक. एकात्म (Ekatm), [S.l.], v. 1, n. 1, p. 17-21, apr. 2018. Available at: <http://management.nrjp.co.in/index.php/Ekatm/article/view/159>. Date accessed: 09 apr. 2020.
Section
Articles